बिलासपुर :- लिंगियाडीह बचाओ सर्वदलीय अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन अपने 18वें दिन एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। धरना स्थल पर आज जिस विशाल जनसमूह ने उपस्थिति दर्ज कराई, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि यह संघर्ष अब केवल दुर्गानगर–चौक क्षेत्र का नहीं,बल्कि पूरे शहर की एक सामूहिक आवाज बन चुका है। सुबह से ही लोग समूहों में पहुँचते रहे, और दोपहर तक पूरा क्षेत्र नारों, तख्तियों और जोशीले भाषणों से गूंजता रहा। नागरिकों की संख्या में लगातार इज़ाफा इस बात का संकेत है कि नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ आम जनता में असंतोष दिनोंदिन बढ़ रहा है। विभिन्न सामाजिक संगठन, व्यापारिक समुदाय, महिला समूह, युवा संगठन, मजदूर संघ और अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि एक मंच पर आकर इस आंदोलन को एक बड़ा स्वरूप देने लगे हैं। उनका कहना है कि जिस प्रकार से बेदखली की कार्रवाई की जा रही है,वह गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के जीवन और भविष्य से खिलवाड़ है आंदोलनकारियों का यह भी आरोप है कि नगर निगम ने इस कार्रवाई के पीछे के कारणों और वास्तविक योजनाओं को लेकर जनता के सामने कोई पारदर्शी पक्ष प्रस्तुत नहीं किया है।
*113 परिवारों की चिंता बढ़ी — बुज़ुर्गों की आँखों में भय,बच्चों के भविष्य पर संकट*
दुर्गानगर और चौक क्षेत्र के वे 113 परिवार इस समय सबसे अधिक संकट में हैं जिन्हें नोटिस देकर घर खाली करने को कहा गया है। यह वे परिवार हैं जिनमें से कई तीन पीढ़ियों से इसी भूमि पर रह रहे हैं। बुज़ुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी की सारी कमाई इन छोटे-छोटे घरों को बनाने में लगा दी। यहाँ तक कि वे वर्षों से संपत्तिकर, जलकर और अन्य नगरीय कर समय–समय पर जमा करते आए हैं। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि राजीव आश्रय योजना में उन्हें बाकायदा पट्टा दिया गया था, और 10 रुपये प्रति वर्गफुट प्रीमियम राशि का भुगतान कर उनकी रसीद भी जारी की गई थी। ऐसी स्थिति में अब उन्हीं को अवैध कब्जाधारी बता देना कानून और न्याय दोनों के सिद्धांतों के विपरीत है। निवासियों ने कहा कि नगर निगम ने न तो पट्टा निरस्तीकरण का कोई स्पष्ट नोटिस दिया और न ही बेदखली का कोई ठोस आधार। लोगों का आरोप है कि यदि शहर में विकास योजनाएँ बन रही हैं, तो नागरिकों को अंधेरे में रखकर नहीं, पारदर्शिता के साथ बताया जाना चाहिए।
*तोड़फोड़ की पूर्व घटनाओं से जनता में गहरी आशंका कई परिवार अब भी बिना पुनर्वास भटक रहे*
धरना स्थल पर संबोधित करते हुए कई वरिष्ठ नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि इससे पहले रामनगर, श्यामनगर, चिंगराजपारा जैसे क्षेत्रों में सड़क चौड़ीकरण और नाली विस्तार के नाम पर घर तोड़ दिए गए थे। कई परिवारों को उचित पुनर्वास नहीं मिला, और वे आज भी किराए के घरों में संघर्ष कर रहे हैं इन्हीं घटनाओं ने अब शहर के अन्य क्षेत्रों में भी भय का वातावरण बना दिया है। मोपका, चिल्हांटी, बहतराई, खमतराई, बिरकोना, मंगला और चिंगराजपारा जैसे इलाकों में लोगों ने आशंका जताई कि निगम की अगली कार्रवाई कहीं उनके घरों पर न आ जाए। यह असुरक्षा भाव पूरे शहर में चिंता की लहर की तरह फैल रहा है।
*महिला शक्ति की अभूतपूर्व उपस्थिति संघर्ष का नेतृत्व अब माताएँ और बेटियाँ कर रहीं धरना स्थल पर बड़ी संख्या में*
महिलाएँ उपस्थित रहीं यशोदा पाटिल, अपर्णा पटेल, साधना यादव, पिंकी देवांगन, नंदकुमारी देवांगन, शुकवारा यादव, मरजीना बेगम, अनीता ध्रुव, दशमत गोंड़, सुखमती, गेजा, सबिता गोस्वामी, पुष्पा देवांगन, सरस्वती देवांगन, सोन बाई, कुमारी निषाद, ललिता मानिकपुरी, संतोषी देवांगन, रानी देवांगन, पिहरिया बाई, प्रीति साहू, जानकी देवांगन, संतोषी यादव, रामकली यादव, सबिता डे, कल्पना जनोका, गायत्री देवांगन, कुसुम मिश्रा, कुंदीया, कौशिल्या मानिकपुरी, अंजु श्रीवास, वंदना डे, मुन्नी गोंड़, फुलबाई साहू, मीना भास्कर, सोनिया निषाद, मधु यादव, रेशमी आहिरवार, अमन टेलर, कुन्ती प्रजापति,अनीता पाटिल, सोनिया मानिकपुरी, फुलबाई, चन्द्रकली निषाद, चमेली बाई सहित अनेक महिलाएँ मौजूद रहीं।
आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत महिलाओं की बढ़ती भूमिका है। प्रतिदिन सैकड़ों महिलाएँ धरना स्थल पर पहुँचकर अपने परिवारों की सुरक्षा की लड़ाई लड़ रही हैं। वे तख्तियाँ लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं—“हमारे घर नहीं टूटेंगे”,
“बच्चों का भविष्य सुरक्षित करो”,
“बेदखली नहीं,अधिकार चाहिए”।
महिलाओं ने कहा कि यदि सरकार शहर के विकास के नाम पर कोई परियोजना करना चाहती है,तो उसे पहले उचित,सुरक्षित और मानवीय पुनर्वास योजना लागू करनी चाहिए। महिलाओं के अनुसार,विकास के नाम पर किसी भी परिवार को उजाड़ना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। एक युवा महिला ने कहा—“हम विकास के विरोधी नहीं,लेकिन बिना पुनर्वास के घर तोड़ना किसी भी परिवार का जीवन बर्बाद करना है।”
*धरना स्थल पर गूंजा एक ही स्वर “नहीं तोड़ने देंगे घर, चाहे कीमत जो हो”*
धरना स्थल पर नागरिकों ने अपनी माँगों को फिर दोहराया,बेदखली की हर कार्रवाई तत्काल रोकी जाए,पट्टा प्राप्त परिवारों को पूर्ण वैध मान्यता दी जाए,किसी भी विकास परियोजना से पहले पुनर्वास की ठोस व्यवस्था लागू की जाए,नगर निगम जनता के समक्ष पारदर्शी योजना प्रस्तुत करे,लोगों ने ऐलान किया कि यदि प्रशासन कोई समाधान नहीं लाता, तो यह आंदोलन और तीव्र किया जाएगा तथा बड़े पैमाने पर सत्याग्रह और रैलियाँ निकाली जाएँगी।
*पत्रकार संगठन का समर्थन आंदोलन को मिला और बल*
लिंगियाडीह वार्ड क्रमांक 52 के झुग्गी–झोपड़ी बस्ती के समर्थन में छत्तीसगढ़ प्रखर पत्रकार महासंघ ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए आंदोलन को नैतिक समर्थन दिया उपस्थित प्रमुख पदाधिकारी प्रदेश अध्यक्ष विनय मिश्रा,प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष उमाकांत मिश्रा,प्रदेश कोषाध्यक्ष राजेन्द्र कश्यप,जिला अध्यक्ष कमल दुसेजा,जिला उपाध्यक्ष भूषण प्रसाद श्रीवास,जिला महासचिव गौतम बाल बोंदरे,साथ ही ध्रुव चन्द्रा,पवन वर्मा,रमेश यादव,पी.आनंद राव,अजय साहू सहित अनेक सदस्य मौजूद रहे इसके साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता,स्थानीय व्यापारी,युवा स्वयंसेवक और महिला समुह भी आंदोलन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कई संगठनों ने घोषणा की कि वे निरंतर धरना स्थल पर उपस्थित रहेंगे और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में आवाज उठाते रहेंगे।
