बिल्हा, बिलासपुर (छ.ग.) :— जनता को पारदर्शी शासन व्यवस्था देने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए बनाए गए ‘सूचना का अधिकार’ (RTI) कानून का ग्राम पंचायतों में सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है। ताजा मामला जनपद पंचायत बिल्हा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रमतला और मदनपुर का है, जहाँ जन सूचना अधिकारियों (पंचायत सचिवों) द्वारा न केवल RTI कानून की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों के वैध आदेशों की भी खुलेआम अवहेलना की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त विवरण के अनुसार आवेदक ने ग्राम पंचायत रमतला और मदनपुर से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जानकारी प्राप्त करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया था।
रमतला पंचायत का रवैया: ग्राम पंचायत रमतला के जन सूचना अधिकारी (सचिव श्री राजकुमार श्रीवास) ने नियमानुसार 30 दिनों की निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बाद भी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।
मदनपुर पंचायत का रवैया: वहीं, मदनपुर ग्राम पंचायत के जन सूचना अधिकारी ने मनमानी की हद पार करते हुए आवेदक का आवेदन शुल्क सहित वापस लौटा दिया।
निचले स्तर पर सुनवाई न होने पर आवेदक ने प्रथम अपीलीय अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत बिल्हा (कुमार सिंह) के समक्ष अपील दायर की थी (प्रथम अपील प्रकरण क्रमांक 142/2026)।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद CEO कुमार सिंह ने दिनांक 27/08/2026 को आदेश पारित कर जन सूचना अधिकारी/सचिव श्री राजकुमार श्रीवास (ग्राम पंचायत रमतला) एवं मदनपुर के जन सूचना अधिकारी को आदेशित किया था कि 15वें वित्त आयोग से संबंधित चाही गई जानकारी स्वयं के व्यय पर निःशुल्क 15 दिवस के भीतर अपीलार्थी को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं तथा उसकी पावती व पालन प्रतिवेदन कार्यालय को भेजें।
CEO के आदेश की मियाद पूरी होने के बाद भी जब जन सूचना अधिकारियों द्वारा न तो जानकारी दी गई और न ही कोई पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, तो जनपद CEO कार्यालय द्वारा दिनांक 18/09/2026 (क्रमांक 1429/सू.का.अ./ज.पं./2026-27) के तहत सख्त अंतिम नोटिस जारी किया गया है।
जारी नोटिस में CEO कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा है:
“निर्धारित समायावधि व्यतीत हो जाने के उपरांत भी आपके द्वारा न तो अपीलार्थी को जानकारी उपलब्ध कराई गई है और न ही इस कार्यालय में पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है। आपका यह कृत्य वरिष्ठ कार्यालय के वैध आदेशों की अवहेलना एवं सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की भावनाओं के विपरीत गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।”
नोटिस के माध्यम से दोनों जन सूचना अधिकारियों को पत्र प्राप्ति के 03 दिवस के भीतर वांछित जानकारी निःशुल्क प्रदाय कर पावती सहित पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का अंतिम निर्देश दिया गया है।
CEO बिल्हा ने नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि नियत समयावधि में आदेश का परिपालन नहीं किया जाता है, तो इसे ‘स्वेच्छा से आदेश का उल्लंघन’ माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित जन सूचना अधिकारियों के विरुद्ध RTI अधिनियम, 2005 की धाराओं और पंचायत सेवा नियमों के अंतर्गत अनुशासनात्मक व दंडात्मक कार्रवाई हेतु उच्च अधिकारियों (मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत बिलासपुर) एवं राज्य सूचना आयोग को प्रकरण प्रेषित कर दिया जाएगा, जिसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे।
जनपद CEO के सख्त आदेशों के बाद भी जमीनी स्तर पर जानकारी न मिलने से RTI कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के मन में गहरा रोष व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 15वें वित्त आयोग की राशियों के उपयोग में पारदर्शिता छुपाने के उद्देश्य से जानकारी देने में टालमटोल की जा रही है। आवेदक अब मामले की द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग में करने की तैयारी कर रहे हैं।
शासन-प्रशासन से मांग की जा रही है कि ऐसे गैर-जिम्मेदार और मनमानी करने वाले जन सूचना अधिकारियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए ताकि कानून की विश्वसनीयता बनी रहे।